समुद्री जीवन पर शोर प्रभाव 60% कम होता है। जैव-अनुकरण सिद्धांतों पर आधारित है। मछली व डॉल्फिन की तैराकी से प्रेरित है। कम गति पर बेहतर दक्षता प्रदान करता है। 2030 तक मानक तकनीक बन सकता है